बस्तर : बंदूक नहीं विश्वास की जीत होनी चाहिए

-दिवाकर मुक्तिबोध 28 अप्रैल को राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा- नक्सलियों से अब आर-पार की लड़ाई है। जब तक उनका सफाया नहीं हो जाता, वे चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब नक्सलियों से कोई बातचीत नहीं होगी। बस्तर में नक्सली हिंसा पर मुख्यमंत्री की चिंता, बेचैनी और नाराजगी स्वाभाविक है। वर्ष 2003 से उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और राज्य की इस भीषणतम समस्या जो राष्ट्रीय भी है, पर अब तक काबू नहीं पाया जा सका है। और तो और मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2013 से जारी उनके तीसरे कार्यकाल में नक्सली घटनाएं बढ़ी हैं तथा हिंसा का ग्राफ और उपर चढ़ा है। राज्य के नक्सल इतिहास में सर्वाधिक स्तब्धकारी घटना अप्रैल 2010 में बस्तर के ताड़मेटला में घटित नक्सल हमला था जिसमें केन्द्रीय सुरक्षा बल के 75 जवान मारे गए थे। तब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। इस नरसंहार से पूरे देश में शोक और गुस्से की जबरदस्त अभिव्यक्ति हुई। सरकार ने नक्सलियों से निपटने कमर कसी, व्यूहरचनाएं बनाई गई, बड़ी-बड़ी बातें की गई, छत्तीसगढ़ में...