म्यान में नहीं तलवारें

- दिवाकर मुक्तिबोध इन दिनों छत्तीसगढ़ कांग्रेस की राजनीति में जो कुछ घट रहा है वह प्रदेश में पार्टी के भविष्य की दृष्टि से ठीक नहीं हैं। उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि आंतरिक झगडे व घात-प्रतिघात की वजह से पार्टी ने अपना बहुत नुकसान किया तथा वह पन्द्रह वर्षों तक सत्ता से बाहर रही। अगर 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने ही कर्मों के भार से भरभराकर गिरी न होती तो कांग्रेस को ऐसा प्रचंड बहुमत न मिल पाता जो आज उसके पास है। इसलिए उसे बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि सत्ता के आंतरिक संघर्ष को टाला जाए और महत्वाकांक्षाओं व अहम को परे रखते हुए एकजुट होकर सुप्रबंधन के जरिए बचे हुए समय में ऐसे काम किए जाए ताकि लोगों को भरोसा हो कि उन्होंने भारी बहुमत से कांग्रेस को सत्ता सौंपकर कोई गलती नहीं की है। यह उनके प्रति पार्टी की जवाबदेही है। लेकिन पिछले चंद महिनों से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व उनके कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच जो रस्साकशी चली हुई है उससे यकीनन अच्छा संदेश नहीं जा रहा है। ताजा घटनाक्रम से य...