अजीत जोगी : न किंग बने न किंगमेकर

-दिवाकर मुक्तिबोध छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभा की 90 सीटों के लिए हुए चुनाव के परिणामों से स्पष्ट है कि प्रदेश की नई-नवेली छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने तीसरे विकल्प के रूप में स्वयं को जिंदा रखा है। अधिकांश राजनीतिक विश्लेषकों जिनमें कुछ उच्च सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं, का ख्याल था कि इस पार्टी का खाता भी नहीं खुलेगा और यदि बहुत हुआ तो एकाध सीट से उसे संतोष करना होगा। अलबत्ता यह आम राय थी कि चुनाव में इस पार्टी की मौजूदगी से भाजपा को कम, कांग्रेस को ज्यादा नुकसान होगा। लेकिन जब परिणाम आए तो वे कांग्रेस के मामले में चौंकाने वाले तो थे ही, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में भी संभावना के प्रतिकूल थे। नया प्रांत बनने के 18 साल बाद यह पहली बार हुआ है कि किसी तीसरी पार्टी ने राजनीति में अपनी कुछ दमदार हैसियत दर्ज कराई हो। बसपा के साथ हुए उसके चुनावी गठबंधन में उसके सात उम्मीदवारों का विधानसभा के लिए चुनकर आना मायने रखता है। इसके पूर्व हुए तीन चुनावों में केवल बसपा के ही इक्के-दुक्के विधायक निर्वाचित होते रहे हैं । हालाँकि 2003 के पहले चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)...