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सन्नाटे में बीता क्रिकेट का एक दिन, उठे कई सवाल

- दिवाकर मुक्तिबोध
क्रिकेट में इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दो बड़ी घटनाएं घटी हैं। दोनों स्तब्धकारी एवं क्रिकेट, क्रिकेटरों व क्रिकेट प्रेमियों के लिए चिंतनीय। आस्ट्रेलिया के युवा प्रतिभाशाली बल्लेबाज फिलिप ह्यूज की सिर पर गेंद टकराने से मौत व भारत में सु्प्रीम कोर्ट का मुद्गल कमेटी रिपोर्ट पर की गयी टिप्पणियां जिसमें उसने चैन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की मान्यता रद्द करने व उसे आईपीएल से बाहर का रास्ता दिखाने कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ और भी कड़ी टिप्पणियां की हैं और इसके घेरे में सीएसके एवं भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी आए हैं। ये दोनों ही घटनाएं विचलित करने वाली हैं।
          भारतीय क्रिकेट टीम इस समय आस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं तथा उसे चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला के बाद त्रिकोणीय एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेलने हैं और फिर कुछ दिनों बाद वर्ल्डकप में हिस्सा लेना है। फिलहाल टीम की कमान विराट कोहली के हाथ में हैं। वे 4 दिसंबर से ब्रिस्बेन में प्रारंभ होने वाले पहले टेस्ट के भी कप्तान हैं क्योंकि पूर्णकालिक कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अभी चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। टीम ने एक अभ्यास मैच खेला है जिसमें उसका प्रदर्शन बेहतर रहा है। लेकिन इस उत्साहवर्धक माहौल में गम की परछाइयां तब घनी हो गई जब 25 नवंबर को सिडनी में शेफिल्ड-शील्ड के एक मैच के दौरान फिलिप ह्यूज एक बाउंसर से गंभीर रूप से घायल हो गए और अंतत: 27 नवंबर को उनकी मौत हो गई। दक्षिण आस्ट्रेलिया के लिए खेल रहे ह्यूज के हेलमेट पर न्यू साउथवेल्स के गेंदबाज शॉन एबॉट की गेंद जोर से टकराई थी। ह्यूज की मौत से जाहिर है आस्ट्रेलिया क्रिकेट ही नहीं समूचा क्रिकेट जगत सन्नाटे में है और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंताए बढ़ गई हैं। यद्यपि क्रिकेट मैचों के दौरान बुरी तरह जख्मी होने अथवा मौत की पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं और प्राय: हर घटना के बाद क्रिकेट प्रबंधकों ने क्रिकेटरों की सुरक्षा पर नए सिरे से विचार किया है। और तद्नुसार नियमों में तब्दीलियां भी की हैं। जाहिर है ह्यूज के मामले में भी सुरक्षा के उपायों पर पुन: गौर किया जाएगा। इस घटना के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, उनके अनुसार यह कुछ हद तक लापरवाही एवं बहुत कुछ इंसानी फितरत का परिणाम है जो प्राय: अपनी सुरक्षा के प्रति गाफिल रहती है। बताया गया है कि फिल ह्यूज ने जो हेलमेट पहनी थी, वह पुराने मॉडल की थी जिससे सिर के पीछे का हिस्सा ठीक तरह से कव्हर नहीं होता। हालांकि इस हेलमेट की आस्ट्रेलियाई निर्माता कम्पनी मसूरी हेलमेट ने दावा किया है कि उसका नया माडल समूचे सिर की सुरक्षा करता है। बहरहाल यह जांच की विषय है तथा फिलहाल आस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लिए भारत के साथ भावी टेस्ट श्रृंखला एक अव्यक्त शोक के बीच खेली जाने वाली है।
         इधर आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग एवं सट्टेबाजी के मामले में मुकुल मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट एवं उसके तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों से भारतीय क्रिकेट हैरान-परेशान है। कमेटी ने 17 नवंबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी जिस पर सुनवाई जारी है। 27 नवंबर को कोर्ट ने पूछा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के निर्वासित अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन को चुनाव लड़ने और उनकी मालिकाना टीम चैन्नई सुपर किंग्स को क्यों न अयोग्य ठहरा दिया जाए? बैंच ने कहा- श्रीनिवासन का बीसीसीआई अध्यक्ष होना और आईपीएल की एक टीम चैन्नई का मालिक होना, हितों का टकराव है। जब चैन्नई सुपर किंग्स के अधिकारी गुरूनाथ मय्यपन सट्टेबाजी के दोषी पाए गए हैं तो बीसीसीआई ने अपने कायदे कानून के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की? क्यों नहीं उसने सीएसके को अयोग्य ठहराया? कोर्ट ने कहा- क्यों न बीसीसीआई के चुनाव होने दिए जाएं और मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट में जिन खिलाड़ियों एवं खेल प्रशासकों के नामों का उल्लेख है, उन्हे इस चुनाव से क्यों न दूर रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट अब आगामी 1 दिसम्बर को इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी करेगा। उसकी तल्ख टिप्पणियों से बीसीसीआई आहत है और अब उसके सामने निर्णायक कदम उठाने के अलावा कोई चारा नहीं है क्योंकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मुद्गल कमेटी की जांच के बाद अब किसी और जांच की जरूरत नहीं है। इसका मतलब है चैन्नई सुपर किंग्स के आईपीएल से बाहर होने के पूरे आसार हैं तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कांफ्रेंस (आईसीसी) के अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के बीसीसीआई का पुन: अध्यक्ष बनने का ख्वाब चूर-चूर होने वाला है।
        इस बीच सुप्रीम कोर्ट की एक और टिप्पणी गौर करने लायक है जो धोनी के संबंध में है। कोर्ट ने चैन्नई सुपर किंग्स के कप्तान के साथ-साथ इंडिया सीमेंट के उपाध्यक्ष के रूप में उनकी दोहरी भूमिका पर चिंता जाहिर की है। इन दोनों के मालिक एन. श्रीनिवासन हैं। इसे देखते हुए आइपीएल 6 स्पॉट फिक्सिंग एवं सट्टेबाजी के मामले में धोनी भी संदेह से परे नहीं है। भले ही उनकी इसमें कोई भूमिका न हो फिर भी कुछ न कुछ कीचड़ तो उन पर उछलना स्वाभाविक है। सीएसके के मुख्य कर्ताधर्ता एवं एन. श्रीनिवासन के दामाद गुरूनाथ मयप्पन की इस मामले में संलिप्तता इसकी मुख्य वजह है।
          बहरहाल सन 2013 के आईपीएल फिक्सिंग के मामले में अगले कुछ दिनों में स्थितियां काफी स्पष्ट हो जाएंगी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है समय। फिक्सिंग पर कोर्ट का फैसला ऐसे समय आएगा जब धोनी की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम आस्ट्रेलिया से टक्कर लेगी। इसमें भी खास बात है वर्ल्ड कप जो आस्टेÑलिया-न्यूजीलैंड की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होगा। इसकी शुरुआत 14 फरवरी 2015 से होने वाली है। और जिसके लिए बीसीसीआई खासी तैयारी कर रहा है ताकि वर्ल्ड कप के खिताब पर कब्जा बरकरार रखा जा सके। इस दृष्टि से टीम को तैयार करने में लगातार प्रयोग होते रहे हैंं और अब बेहतर युवा टीम धोनी की अगुवाई में मोर्चे पर निकल गई है। ऐसे में यदि धोनी अथवा चेन्नई सुपर किंग्स को लेकर कोर्ट का विपरीत फैसला आता है तो वह न केवल धोनी वरन पूरी टीम के मनोबल को प्रभावित करेगा। धोनी वैसे काफी ठंडे दिमाग के क्रिकेटर माने जाते हैं, किंतु खिलाफ टिप्पणियां भी कहीं न कहीं व्यक्ति को आंदोलित करती हैं। इसलिए ज्यादा बेहतर होता यदि मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट पर फैसला थोड़ा ठहरकर आता या वर्ल्ड कप के बाद आता। यह ठीक है कि अप्रैल 15 से प्रारंभ होने वाला आईपीएल 8 टूर्नामेंट का कार्यक्रम इससे प्रभावित होता, किंतु वर्ल्ड कप की महत्ता को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने में कोई दिक्कत नहीं होती।  बहरहाल अब फिक्सिंग पर फैसला आने को है। उम्मीद की जानी चाहिए विपरीत फैसलों एवं प्रतिकूल टिप्पणियों के बावजूद महेंद्र सिंह धोनी विचलित नहीं होंगे तथा वर्ल्ड कप की भारतीय उम्मीदों को जिंदा रखेंगे।

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